राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का क्रमिक अनशन जारी, 43वें दिन बढ़ा सरकार के प्रति रोष

उत्तराखंड केसरी | समाचार देहरादून, 27 जुलाई। पिछले दो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का

Jul 27, 2026 - 18:37
 163  5.2k
राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का क्रमिक अनशन जारी, 43वें दिन बढ़ा सरकार के प्रति रोष
राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का क्रमिक अनशन जारी, 43वें दिन बढ़ा सरकार के प्रति रोष

राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का क्रमिक अनशन जारी, 43वें दिन बढ़ा सरकार के प्रति रोष

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का क्रमिक अनशन 43वें दिन भी जारी रहा। यह आंदोलन पिछले दो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे आश्रितों द्वारा किया जा रहा है।

देहरादून, 27 जुलाई। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का क्रमिक अनशन, जो कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच के तत्वावधान में शहीद स्मारक, देहरादून में चलाया जा रहा है, सोमवार को लगातार 43वें दिन भी जारी रहा। यह अनशन उन आश्रितों द्वारा किया जा रहा है जो पिछले दो वर्षों से सरकारी नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मांगों को लेकर आंदोलनकारियों की नाराजगी

आज के अनशन में ऋषिकेश की शांति तड़ियाल एवं उत्तरकाशी के पंकज सिंह रावत शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने एक बैठक कर अपनी आगामी रणनीति पर चर्चा की और सरकार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि 43 दिनों के लंबे संघर्ष के बावजूद उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी नियुक्ति संबंधी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो सरकार की "बुद्धि-शुद्धि" के लिए यज्ञ आयोजित किया जाएगा।

समर्थकों का जुटान

इस अनशन में समर्थन देने वालों में राम किशन, नवीन नैथानी, शैलेश सेमवाल, अम्बुज शर्मा, मनोरथ प्रसाद ध्यानी, प्रभात डंडरियाल, मोहन सिंह खत्री, रामेश्वरी नेगी, आनंद सिंह तड़ियाल, हरिओम ओमी, शिव प्रसाद भट्ट, सुरेश कुमार, पुष्पा रावत, संजीव कुमार, वासुदेव नौटियाल, रामपाल सिंह, बालेश बवानिया, सावित्री पवार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। उनके समर्थन ने इस आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान की है।

सरकार की प्रतिक्रिया

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस अनशन के प्रति कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर उन्होंने कई बार सरकार से संवाद किया है, लेकिन उनकी बातें अनसुनी की गई हैं। यह स्थिति आश्रितों में गहरा आक्रोश उत्पन्न कर रही है।

आंदोलन का महत्व

यह आंदोलन केवल आश्रितों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के लिए एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। जब लोग अपनी जीविका के लिए सरकारी सहायता की उम्मीद में बैठे हैं, तब उनकी आवाज़ को गंभीरता से लेना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए। यह आंदोलन “संविधान के अनुसार अधिकार” की याद दिलाता है, जिसमें नागरिकों को सरकारी नौकरी और योजना के तहत उचित और सही तरीके से नियुक्त किया जाना चाहिए।

आंदोलनकारियों की निरंतरता इस बात का संकेत है कि वे अपनी मांगों के प्रति कितने गंभीर हैं। हम सभी को यह याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र में सभी की आवाज़ का महत्व होता है, और जब आवश्यकता होती है तो उठाना भी चाहिए।

सरकार को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वे लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकें, एवं इस आंदोलन को सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए उचित कदम उठाएं। अन्यथा, जल्द ही स्थिति और भी विकट हो सकती है, जिससे न केवल आश्रितों, बल्कि पूरे राज्य की सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

यदि आप इस विषय में और अधिक जानकारी पाना चाहते हैं, तो कृपया यहाँ क्लिक करें.

इस प्रकार, राज्य आंदोलनकारी आश्रितों का क्रमिक अनशन सरकार के प्रति बढ़ते रोष का एक प्रतिक है। आशा है कि सरकार जल्द ही इस पर उचित कार्रवाई करेगी।

Team Netaa Nagari - राधिका तिवारी

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow