देहरादून में AISBISF के आह्वान पर जोरदार प्रदर्शन, चरणबद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत
देहरादून आज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन (SBISA), देहरादून मॉड्यूल द्वारा एसबीआई प्रशासनिक कार्यालय (AO), देहरादून के समक्ष विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शन अखिल भारतीय स्टेट…
देहरादून में AISBISF के आह्वान पर जोरदार प्रदर्शन
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में आज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन (SBISA) ने एक महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन अखिल भारतीय स्टेट बैंक कर्मचारी संघ (AISBISF) द्वारा अनौपचारिक चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत किया गया। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Netaa Nagari
आज की सुबह देहरादून प्रशासनिक कार्यालय (AO) के बाहर हजारों बैंक कर्मचारियों की भीड़ ने प्रबंधन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। एसबीआई प्रबंधन की तरफ से लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाने के कारण विरोध प्रदर्शन को मजबूती मिली।
देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा
इस प्रदर्शन का आयोजन AISBISF के आह्वान पर किया गया, जिसमें बैंक कर्मचारियों ने अपनी विविध मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। कर्मचारी संघ इस्तीफे की मांग और कर्मियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उठे हैं। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने "हमें हमारा अधिकार दो", "बैंक प्रबंधन का अन्याय नहीं सहेंगे" जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शन में एसबीआईएसए देहरादून मॉड्यूल के उपमहासचिव कमल तोमर ने उपस्थित सभी कर्मचारियों का धन्यवाद दिया और आगे के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, "हमारी आवाज़ सुनने का समय आ गया है, हमें एकजुट होना होगा।"
आगामी कदम
संघ ने आगामी 25 और 26 मई, 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का आह्वान किया है। यह कदम स्थायी समाधान की प्राप्ति के लिए आवश्यक समझा गया है। प्रदर्शन के दौरान कमल तोमर के अलावा अनिल शर्मा, अभिलेख थापा, सौरभ पुंडीर, नीरज ध्यानी, राजकुमार गर्ग, पूनम खरे, साक्षी, एकता यादव, दर्शन असवाल, निखिल मिश्रा, और सौरभ बिष्ट जैसे कई प्रमुख सदस्य भी उपस्थित रहे।
कर्मचारियों द्वारा प्रबंधन के खिलाफ जज्बातों की अभिव्यक्ति ने बैंकिंग क्षेत्र में एक नई हलचल पैदा कर दी है। इस घटना का महत्व सिर्फ स्थानिक नहीं है, बल्कि यह एक कठिन दौर के प्रतीक के रूप में उभरता है जहां कर्मचारियों की आवाज़ अनसुनी रह रही है। एसबीआई कर्मचारियों की यह मुखरता उन्हें एक नई दिशा में ले जा सकती है।
संघ की दीर्घकालिक रणनीति
संघ की दीर्घकालिक रणनीति में भी इन मुद्दों का समावेश है। भले ही आज का प्रदर्शन मजबूती से देखा गया हो, लेकिन यह केवल शुरूआत है। बैंक कर्मचारियों ने ठान लिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
कर्मचारी संघ की यह एकजुटता और दृढ़ता आने वाले समय में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लाने में अहम भूमिका निभा सकती है। सभी को समझना होगा कि यह सिर्फ एक संगठन की लड़ाई नहीं, बल्कि यह सभी बैंक कर्मचारियों की सामूहिक आवाज़ है।
इस आंदोलन का समापन कैसे होगा, यह तो भविष्य में ही स्पष्ट होगा, लेकिन आज की एकजुटता ने दिखाया है कि जब बात हक की हो, तो एकजुट होना कितना महत्वपूर्ण है।
अगर आप इस मुद्दे पर और जानकारी चाहते हैं, तो हमारे साथ जुड़े रहें। हमारी वेबसाइट Netaa Nagari पर और पढ़ें।
टीम नेटा नगरी
कमल तोमर,
उपमहासचिव,
एसबीआईएसए देहरादून अंचल
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