गैरसैंण समर्थकों का हल्लाबोल- देहरादून में विधानसभा के बाहर मुंडन करा जताया विरोध,15 अगस्त से शुरू होगी देहरादून से गैरसैंण पदयात्रा

देहरादून उत्तराखंड की आत्मा, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ रही ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ ने आज राज्य सरकार की हठधर्मिता और जनभावनाओं की अनदेखी के खिलाफ उग्र…

Aug 14, 2026 - 00:37
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गैरसैंण समर्थकों का हल्लाबोल- देहरादून में विधानसभा के बाहर मुंडन करा जताया विरोध,15 अगस्त से शुरू होगी देहरादून से गैरसैंण पदयात्रा

देहरादून

उत्तराखंड की आत्मा, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ रही ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ ने आज राज्य सरकार की हठधर्मिता और जनभावनाओं की अनदेखी के खिलाफ उग्र रुख अपनाते हुए देहरादून विधानसभा के बाहर ऐतिहासिक सामूहिक मुंडन कराया।

समिति के सदस्यों ने कड़े शब्दों में हुंकार भरते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता का हक मारने वाली यह संवेदनहीन सरकार हमारे लिए मर चुकी है और जब सरकार मृत समान हो चुकी है, तो मुंडन कराकर शोक व आक्रोश प्रकट करना ही एकमात्र रास्ता बचता है। आज के इस अभूतपूर्व विरोध-प्रदर्शन में समिति के मुख्य संयोजक पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी, गोपाल दत्त कुमेड़ी, दुर्गा प्रसाद थपलियाल, मनमोहन शर्मा, विकास रयाल, दमन सिंह, कुलदीप अग्रवाल और अनूप मेमन ने अपने केश त्यागकर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया।

विरोध प्रदशन के दौरान पार्थ रतूड़ी ने सत्ता के गलियारों को झकझोरते हुए कहा कि हमने दिल्ली, देहरादून, कर्णप्रयाग, चौखुटिया और रुद्रप्रयाग में उग्र प्रदर्शन किए और देहरादून धरना स्थल पर 100 से भी अधिक दिनों तक लगातार क्रमिक अनशन किया, लेकिन अंधी-बहरी सरकार, बेपरवाह अधिकारियों और सत्ताभोगी नेताओं को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। नेताओं और अधिकारियों को आम जनता का दर्द इसलिए समझ नहीं आ रहा क्योंकि वे और उनके बच्चे तो वातानुकूलित महलों में ऐश कर रहे हैं, जबकि पहाड़ों की असली पीड़ा, दुख और विकट समस्याओं की आग में हमारी माताएं, बहनें और पहाड़ के सीधे-साधे भाई झुलस रहे हैं। अब यह अन्याय और अत्याचार बर्दाश्त से बाहर हो चुका है।

समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि आज के इस सामूहिक मुंडन के बाद आंदोलन और भी विकराल रूप धारण करेगा। इसी क्रम में आगामी स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को देहरादून स्थित अस्थाई विधानसभा के बाहर से उत्तराखंड की आत्मा मानी जाने वाली स्थायी राजधानी गैरसैंण तक ऐतिहासिक महा-पदयात्रा का आगाज किया जा रहा है। समिति के पदाधिकारियों ने एक स्वर में ऐलान किया कि जब तक गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई न थमेगी और न ही कोई गैरसैंण प्रेमी चैन की सांस लेगा। अब लड़ाई सीधी है,प्रण से प्राण तक, गैरसैंण हमारा अधिकार है और हम इसे लेकर ही रहेंगे।

इस विरोध प्रदर्शन में साथी मौजूद रहे विनोद प्रसाद रतूड़ी, गोपाल दत्त, पार्थ रतूड़ी, दुर्गा प्रसाद थपलियाल, अनूप मेमून, शम्भो प्रसाद सेमवाल, कुलदीप अग्रवाल, मनमोहन शर्मा, दमन सिंह, सुधीर गैरोला, हरीश चंद्र रतूड़ी, दयाल सिंह राणा, सचिन थपलियाल, अजय नेगी।

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