उत्तराखंड की विंडलास बायोटेक में कर्मचारियों का प्रदर्शन, वेतन में वृद्धि की मांग
Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून के मोहब्बेवाला स्थित Windlas Biotech Limited में रविवार सुबह कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ गया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने कंपनी गेट के बाहर एकत्र होकर प्रदर्शन किया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि, अस्थायी कर्मचारियों को दिए जाने वाले अनिवार्य ब्रेक और स्थायीकरण जैसे … The post वीडियो: उत्तराखंड की नामी कंपनी में रोजगार के नाम पर उत्पीड़न, सालभर काम लेकर तीन महीने बैठा रहे घर, फिर नए सिरे से नौकरी appeared first on Round The Watch.
उत्तराखंड की विंडलास बायोटेक में कर्मचारियों का प्रदर्शन, वेतन में वृद्धि की मांग
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून स्थित विंडलास बायोटेक में कर्मचारियों ने रविवार को प्रदर्शन कर अपनी समस्याएं उजागर की। कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं वेतन वृद्धि, अनिवार्य ब्रेक नीतियों का संशोधन और स्थायी नौकरी की मांग।
Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून के मोहब्बेवाला में स्थित विंडलास बायोटेक लिमिटेड में रविवार की सुबह कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ गया। बड़ी संख्या में कर्मचारी कंपनी के गेट के बाहर एकत्र हुए और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि, अस्थायी कर्मचारियों को दिए जाने वाले अनिवार्य ब्रेक, और स्थायीकरण जैसे मुद्दों को लेकर अपनी नाराजगी जताई।
बताया गया कि सुबह करीब छह बजे कुछ कर्मचारी कंपनी परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। धीरे-धीरे अन्य शिफ्टों के कर्मचारी भी वहां पहुंचने लगे, जिससे मौके पर भीड़ बढ़ती चली गई। स्थिति तनावपूर्ण होती देख पुलिस भी मौके पर पहुंची और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी में लगभग 700 कर्मचारी विभिन्न शिफ्टों में काम कर रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या अस्थायी कर्मचारियों की है। उनका कहना है कि मौजूदा वेतन महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। कर्मचारियों के अनुसार उन्हें हर महीने करीब 11 से 12 हजार रुपये वेतन मिलता है, जिससे परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने वेतनमान में बढ़ोतरी की मांग उठाई।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कंपनी की “ब्रेक नीति” को सबसे बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि एक वर्ष तक लगातार काम लेने के बाद अस्थायी कर्मचारियों को करीब तीन महीने का ब्रेक दे दिया जाता है। इसके बाद उन्हें फिर से दस्तावेज जमा कर नई नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे नौकरी की असुरक्षा बनी रहती है और आर्थिक संकट पैदा होता है।
कर्मचारियों ने कहा कि यदि कंपनी उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं देना चाहती, तो कम से कम एक साल बाद अनिवार्य ब्रेक को समाप्त किया जाना चाहिए। बार-बार नौकरी टूटने से उनकी ईपीएफ, अनुभव और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी असर पड़ता है।
मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस बीच, कंपनी प्रबंधन की ओर से देर शाम तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।
विंडलास बायोटेक में कर्मचारियों की इस असंतोषजनक स्थिति ने ना सिर्फ उन्हें, बल्कि पूरे कामकाजी वर्ग को भी चिंता में डाला है। अगर सुधार नहीं किया गया, तो यह न केवल उनकी नौकरी की सुरक्षा को प्रभावित करेगा, बल्कि इससे बड़ा सामाजिक मुद्दा भी बन सकता है।
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सादर,
Team Netaa Nagari
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