उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, हत्या की साजिश और गंभीर आरोपों का मामला

  देहरादून: 15 अक्टूबर 2026 उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब प्रदेश सरकार की कैबिनेट

Oct 16, 2026 - 00:37
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उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, हत्या की साजिश और गंभीर आरोपों का मामला
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, हत्या की साजिश और गंभीर आरोपों का मामला

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, हत्या की साजिश और गंभीर आरोपों का मामला

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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है, जिसमें हत्या की साजिश, मारपीट और धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं।

देहरादून: 15 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई जब प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में FIR दर्ज कराई। FIR में मंत्री ने वैवाहिक स्थिति छिपाने, अवैध संबंधों, मारपीट, जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने, जान से मारने की धमकी देने और कंपनियों के दस्तावेजों में जालसाजी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामले में सबसे गंभीर आरोप एक ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर है, जिसमें कथित तौर पर मंत्री को नुकसान पहुंचाने और उनकी हत्या की साजिश से संबंधित बातचीत होने की बात है। हालांकि, इसके प्रमाणिकता की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

मानसिक दबाव और सामाजिक स्थिति

FIR दर्ज होने के बाद रेखा आर्य ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपने वैवाहिक रिश्ते में हुए कई दुखद घटनाओं की कहानी बताई। उन्होंने अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है, और वह अस्पताल में भर्ती भी हुई हैं।

रविवार को वीडियो साझा करते हुए, रेखा ने बताया कि उनके पति ने उन्हें शादी के समय अपनी पहली शादी छिपाई थी। रेखा के अनुसार, विवाह के कुछ वर्षों बाद उन्हें पता चला कि उनके पति पहले से विवाहित थे तथा उनके पूर्व विवाह से बच्चे भी हैं। यह आरोप वैवाहिक धोखाधड़ी का मामला बनता है।

दूसरी महिलाओं के साथ कथित संबंध

रेखा आर्य ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि उनके पति के दूसरी महिलाओं के साथ संबंध होने का आरोप लगाया है। रेखा का कहना है कि जब उन्होंने इस विषय में अपने पति से बात की, तो उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी। हालांकि, इसके बावजूद उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।

मारपीट और धमकी का आरोप

FIR में दर्ज किया गया है कि जब रेखा ने अपने पति के इस व्यवहार का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। रेखा ने पुलिस से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

जातिसूचक शब्दों का अपमान

रेखा ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके पति ने कई बार सरकारी आवास पर मौजूद कर्मचारियों के सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है जिससे उनका अपमान हुआ है।

कंपनियों से संबंधित जालसाजी

कंपनियों के निदेशक पद से रेखा आर्य को हटाने के लिए उन्होंने जालसाजी का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें फर्जी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। वे स्पष्ट रूप से यह बताती हैं कि इस संबंध में न तो उन्होंने कोई त्यागपत्र दिया था और न ही उन्होंने ऐसे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।

संवेदनशील ऑडियो रिकॉर्डिंग

FIR में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया गया है, जिसमें कथित तौर पर उनके पति और एक महिला के बीच बातचीत हो रही है, जिसके अनुसार रेखा को खतरे में डालने की साजिश की जा रही थी। यह ऑडियो रिकॉर्डिंग इस मामले के सबसे संवेदनशील पहलुओं में से एक है।

सोशल मीडिया पर रेखा की अपील

FIR दर्ज कराने के बाद, रेखा आर्य ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया जिसमें उन्होंने घरेलू अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, "महिला आम हो, महिला खास हो… घरेलू अत्याचार न सहना है, न सहना है, बल्कि उसे कहना है।"

बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति

इस बीच, रेखा की तबीयत भी बिगड़ गई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए हमें केवल पुष्ट जानकारी का ही उपयोग करने की आवश्यकता है।

कानूनी धाराएँ और आगे की प्रक्रिया

FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं का उल्लेख किया गया है, जैसे कि:

  • धारा 120-B — आपराधिक षड्यंत्र
  • धारा 323 — स्वेच्छा से चोट पहुंचाना
  • धारा 420 — धोखाधड़ी
  • धारा 467 — महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी
  • धारा 495 — पूर्व विवाह छिपाकर विवाह करना
  • धारा 498-A — पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता
  • इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित जांच और स्वतंत्र सुनवाई आवश्यक है। संबंधित पक्ष का जवाब और पुलिस जांच का निष्कर्ष मामले की सच्चाई को उजागर करने में महत्वपूर्ण होंगे।

उत्तराखंड केसरी के पाठकों को इस मामले में आगे के विकास और सच्चाई के बारे में जानकारी दी जाती रहेगी।

 

— Team Netaa Nagari, प्रियंका शर्मा

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